Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hu | Romantic Hindi Poetry Lyrics

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hu कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ Hindi Poetry Song Lyrics

प्रेमी का अपने प्रेमिका के लिए जो प्यार है उसके चेहरे पर हमेशा ख़ुशी देखते रहने का जो उसका विचार है उसकी खुशियों से बड़ा ना कोई संसार है उस भावनाओ को प्रेमी अपने इस कविता के माध्यम से प्रस्तुत कर रहा है दिल को छूने वाली कविता रोमांटिक पोएट्री आपको जरूर पढ़नी चाहिए और अपने प्रेमिका को अपने अंदाज में सुना कर उसके दिल पर अपना एक प्यारा निशान जीवन भर के लिए छोड़ना चाहिए,

आप उनकी ख़ुशी को कितनी एहमियत देते है और उनकी ख़ुशी में कमी आने पर आप किस तरह की भावनाओ से लिप्त हो जाते है ये बात उनको बताने का ये सबसे बेहतर और रोमांटिक अंदाज होगा

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hu | Romantic Hindi Poetry Lyrics

खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ,

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

तेरे आगे मै सारी दुनिया को कम देखता हूँ,

तुझसे जुदा हो कर भी मै तुझमे हम देखता हूँ,

तेरे हर जख्मो का मैं खुद को मरहम देखता हूँ

चेहरे में तेरे ईश्वर का करम देखता हूँ

खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ,

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

भूल कर मैं खुशिया अपने बस तेरे गम देखता हूँ

पास रहो या ना मुस्कुराती रहो मैं ऐसा सपन देखता हूँ

माना ना था जिस खुदा को मैं उसका रहम देखता हूँ

बिन पेड़ के मिल रहे फलो का मै उपवन देखता हूँ

खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ,

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

हाथ जब तेरा हो मेरे हाथ में कड़ा हाथ भी मै अपना नरम देखता हूँ

अँधेरे में जब हो तू साथ मेरे तेरे आँखों में तब भी मै एक चमक देखता हूँ

तेरे संग बिताए एक पल में मैं सतो जनम देखता हूँ

मर कर मिलेगा इससे अच्छा जनम तब तक क्यों मै ऐसा भरम देखता हूँ

खुदा जो ना जाने मेरे दर्द को क्यों ऐसे खुदा का मैं चरण देखता हूँ

आवाज जब तेरा मैं सुनता हूँ कान्हा की मुरली की धुन देखता हूँ

कृष्णा सा ना ही था मैं पर राधा से ना मैं तुझको कम देखता हूँ

फिर अब हस्ते हुए चेहरे पर क्यों मैं गम देखता हूँ

खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ,

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

भागते हुए इस दुनिया में जब मैं तुमको थम देखता हूँ

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

कभी ना गया जिस चौखट पर तेरे लिए उस दर पर भी सर टेकता हूँ

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

हर माटी की मूरत में मैं ईश्वर अल्लाह भगवन देखता हूँ

खाली मैदान में भी हरा भरा उपवन देखता हूँ

राम के चरणों में तब मै अपना शरण देखता हूँ

खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ,

कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ,

YouTube Video- Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun कहाँ फिर मैं लाजो सरम देखता हूँ Lyrics

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun,

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Tere Aage Mai Sari Duniya Ko Km Dekhta Hun,

Tujhse Juda Ho Kar Bhi Mai Tujhme Hum Dekhta Hun,

Tere Har Jakhmo Ka Main Khud Ko Marahm Dekhta Hun

Chehre Me Tere Ishwar Ka Karam Dekhta Hun

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun,

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Bhul Kar Main Khushiya Apne Bs Tere Gum Dekhta Hun

Pas Raho Ya Na Muskurati Raho Mai Aisa Sapan Dekhta Hun

Mana Naa Tha Jis Khuda Ko Main Uska Raham Dekhta Hun

Bin Ped Ke Mil Rahe Phalo Ka Mai Upwan Dekhta Hun

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun,

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Haath Jab Tera Ho Mere Hath Me Kada Hath Bhi Mai Apna Naram Dekhta Hun

Andhere Me Jab Ho Tu Sath Mere Tere Ankho Me Tab Bhi Mai Ek Chamak Dekhta Hun

Tere Sang Bitaye Ek Pal Me Mai Sato Janam Dekhta Hun

Mar Kar Milega Isse Achha Janam Tab Tak Kyu Mai Aisa Bharam Dekhta Hun

Khuda Jo Naa Jaane Mere Dard Ko Kyu Aise Khuda Ka Main Charan Dekhta Hun

Awaj Jab Tera Mai Sunta Hun Kanha Ki Murli Ki Dhun Dekhta Hun

Krishna Sa Na Hi Tha Mai Par Radha Se Na Main Tujhko Km Dekhta Hun

Fir Ab Haste Huye Chehare Par Kyu Mai Gum Dekhta Hun

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun,

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Bhagte Huye Is Duniya Me Jab Main Tumko Thm Dekhta Hun

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Kabhi Naa Gya Jis Chaukhat Pr Tere Liye Us Dar Par Bhi Sar Tekata Hun

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun

Har Maati Ki Murat Me Main Ishwar Allah Bhagwan Dekhta Hun

Khali Maidan Me Bhi Hara Bhara Upwan Dekhta Hun

Aam Ke Charano Me Tab Mai Apna Sharan Dekhta Hun

Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun,

Kahan Fir Main Lajo Saram Dekhta Hun


डेली इन्स्पीरेशन बोर्ड की टीम के द्वारा प्रस्तुत ये रोमांटिक हिंदी कविता खुशी जब भी तेरी मैं कम देखता हूँ (Khushi Jab Bhi Teri Mai Km Dekhta Hun) का लेख Lyrics आपको पसंद आया होगा हम ऐसा उम्मीद करते है, की अपने इस कविता पोएट्री को अपने प्रेमी प्रेमिका के सामने प्रस्तुत कर के उनके दिल और मन को प्रभूलित करने में सफल हुए होंगे,

आपके पार्टनर को और आपको ये कविता कैसा लगा आप कमेंट बॉक्स में अपनी राय जरुर दें आपकी राय सुझाव और सवाल हमारी टीम के लिए बहुत महत्व पूर्ण होते है और हम आपके अपने हर व्यक्तिगत सुझाव को सम्मान देते है,

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